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क्या है "टीबी" जिसने सारी दुनिया को चपेट में ले रखा है।


टीबी(क्षय रोग) आज संपूर्ण विश्व के लिए एक विकराल समस्या बनती जा रही है। हर साल लाखों लोग इस गंभीर बीमारी के चलते अपनी जान गंवा देते हैं। चलिए दोस्तों आज हम जानेंगे टीबी के बारे में सब कुछ।
एक सर्वे के मुताबिक वर्ष 2016 में कुल 1.4 करोड लोग इस बीमारी से पीड़ित थे जिनमें से लगभग 18 लाख लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। यह जानना काफी महत्वपूर्ण है कि हर साल टीबी के कारण अपनी जान गवाने वाले लोगों में से 27% भारत में से हैं यह आंकड़ा हम भारतीयों के लिए काफी चिंताजनक है। टीबी के बढ़ते प्रकोप को कम करने के लिए तथा लोगों को इसके बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए हर साल 24 मार्च "विश्व टीबी दिवस" के रूप में मनाया जाता है।
 क्या है "टीबी"
world tb day
बात की जाए
टीबी के उपचार की तो वर्तमान की चिकित्सा पद्धति से टीबी का उपचार पूर्णतः संभव है। लेकिन आज से कुछ वर्षों पूर्व तक ऐसा नहीं था अर्थात जिन लोगों को टीबी हो जाती थी उनकी मृत्यु लगभग तय ही हो जाती थी। यह लाइलाज बीमारी नहीं है निश्चित समय तक दवाओं के सेवन से इससे मुक्ति पाई जा सकती है।

क्या है "टीबी"

टीबी एक प्रकार का संक्रामक रोग है। जो "माइकोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस" नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।
 क्या है "टीबी"
mycobacterium tuberculosis
इस बैक्टीरिया की खोज सन 1882 में जर्मनी के चिकित्सक डॉक्टर राबर्ट कांख ने की थी। इसके लिए उन्हें 2005 के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। जैसा कि आप जानते हैं कि इस बीमारी का इलाज वर्तमान में संभव है। लेकिन दवाओं का कोर्स पूरा न करने या यह मानकर छोड़ देने के कारण कि अब यह ठीक हो चुकी है, रोगी एक गंभीर स्थिति में फंस जाता है जिसके बाद उस पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर भी नहीं होता इस स्थिति में रोगी का बचा पाना काफी मुश्किल होता है। बात की जाए
टीबी से प्रभावित होने वाले अंगों की तो यह ज्यादातर हमारे फेफड़ों को प्रभावित करता है। तथा शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित करता है जिसमें हड्डी, हृदय, गुर्दे,आंत इत्यादि हैं।

 टीबी के प्रकार

1-फुफ्फुसीय टीवी।

फुफ्फुसीय टीबी मुख्य रूप से रोगी के फेफड़ों को प्रभावित करती है। टीवी के "पल्मोनरी टीबी" भी कहा जाता है।
phephano ki tb
यह टीवी किसी भी उम्र के लोगों में पाई जाती है। बात की जाए इसके लक्षणों की तो इसके मुख्य लक्षण निम्न हैं। जैसे, सांस का तेज चलना, सिर में दर्द तथा नाड़ियों का तेज चलना।

2-पेट की टीबी

पेट की टीबी भी काफी गंभीर होती है इसमें रोगी के पेट में निम्नलिखित समस्याएं होती है। जैसे बार-बार दस्त का लगना, पेट में दर्द होना, कब्ज का होना। इसलिए पेट में कुछ भी गड़बड़ होने पर हमें शीघ्र ही डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए

3-हड्डियों की टीबी

इसमें हड्डियों में गंभीर घाव हो जाते हैं जो आसानी से भरते भी नहीं है, इसमें शरीर में फोड़े फुंसी भी होने लगती है।

टीवी के सामान्य लक्षण

हम टीबी होने के सामान्य लक्षणों को बड़ी आसानी से पहचान सकते हैं
1-2 सप्ताह या उससे ज्यादा खांसी होने पर टीवी के लक्षणों का अनुमान लगाया जा सकता है।
2-भूख कम लगना, वजन का कम होना भी टीवी के लक्षण दर्शाते हैं। इसके कारण टीवी के मरीज काफी कमजोर हो जाते हैं।
3-बुखार आना, शरीर में गांठ पड़ना तथा ठंड के साथ-साथ पसीना आना आदि की.बी. के लक्षण है

टीबी से बचाव के तरीके

संपूर्ण विश्व में टीबी के विस्तार को देखते हुए आज आवश्यकता है इससे बचने की. टीबी भी एक अत्यंत संक्रमित होने वाला रोग है जो हम निम्नलिखित तरीके अपनाकर इसके संक्रमण से खुद को बचा सकते हैं।
1-टीवी से बचने के लिए हमें बीसीजी का टीका लगवाना चाहिए।
 क्या है "टीबी"
bcg ka tika

2-सार्वजनिक स्थानों में क्षींकने, थूक पीक करने, आदि उत्सर्जन क्रियाओं से बचना चाहिए।
3-पीड़ित व्यक्ति को मुंह में माास लगाना चाहिए ताकि वायरस मुह के माध्यम से अन्य व्यक्ति के शरीर में प्रवेश न कर सकें।

टीबी के बारे में कुछ और महत्वपूर्ण बातें

बहुत से लोगों का मानना है कि टीबी एक अनुवांशिक बीमारी है जो पूर्णत गलत है। बल्कि यह रोग रोगी के  छींकने, खासने आदि के द्वारा संक्रमित होती है। यदि आपको टीबी के कोई लक्षण नहीं है तो भी शायद आपको यह हो सकती है। इसलिए समय-समय पर टीबी की जांच कराते रहना चाहिए। जिससे आवश्यक दवाएं लेकर इससे बचा जा सके। लोगों को  टीबी से बचाने के लिए डांट्स नामक एक अभियान चलाया गया है। जिसमें लोगों की मुफ्त टीबी की जांच की जाती है। तथा पीड़ित लोगों पर पूरी तरह से नजर रखी जाती है जब तक कि रोगी पूर्णता स्वस्थ नहीं हो जाता।

टीबी के लिए कानूनी प्रावधान

भारतीय दंड संहिता की धारा 269 और 270 के तहत इसका इलाज न कराने या दूसरे व्यक्तियों तक पहुंचाने के लिए 6 महीने तक की सजा का प्रावधान है।
प्रिय पाठक आपने देखा कि किस तरह से टीवी अपने पैर पसार रही है आवश्यकता है इसके खिलाफ समुचित कदम उठाने की तथा लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की ताकि सरकार की 2025 तक "टीवी मुक्त भारत" की महत्वाकांक्षी परियोजना को सफल बनाया जा सके।

यदि आपको हमारा यह लेख पसंद आया हो तो अपने नजदीकियों को जरूर शेयर करें ताकि वे भी टीवी के प्रति सजग रह सकें।
धन्यवाद!

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