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थॉमस अल्बा एडिसन के प्रेरणादायक अनमोल विचार।


थॉमस अल्बा एडिसन का जन्म 11 फरबरी 1847 को संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ था। उनकी माता का नाम सैमुअल ऑग्डन एडिसन तथा पिता का नाम नैन्सी मैथ्यू एलियट था। वे अपने माता पिता की सातवीं संतान थे। 
थॉमस अल्बा एडिसन एक महान वैज्ञानिक थे। उन्होंने  अपने जीवन में हजारों अविष्कार किये थे। विद्युत बल्ब का अविष्कार इनका महान अविष्कार था। 
थॉमस अल्बा एडिसन के प्रेरणादायक अनमोल विचार।

थॉमस अल्बा एडिसन के महान विचार 

मैं असफल नहीं हुआ हूं मैंने बस एक हजार ऐसे तरीके खोज लिए हैं जो काम नहीं करते। 

असंतोष प्रगति की पहली आवश्यकता है। 

प्रतिभा एक परसेंट प्रेरणा और 99 परसेंट पसीना है। 


कमजोर आदमी हर काम को असंभव समझता है जबकि वीर आदमी हर काम को संभव।


यदि एक शानदार आईडिया चाहते हो तो ढेर सारे आइडियाज खोजो। 


हम किसी भी चीज के एक परसेंट के 1000000 वें हिस्से के बारे में भी नहीं जानते। 


ज्यादातर लोग अपने जीवन में अवसर गंवा देते हैं क्योंकि यह काम जैसा दिखता है। 


जीवन में ज्यादा आशा वाले लोग वे हैं जिन्होंने तब हार मान ली जब वे सफलता के कितने नजदीक थें।


इंतजार करने से बेहतर है कुछ करो चाहे असफल क्यों न हो जाओ।


हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है हार मान लेना सफल होने का निश्चित तरीका है एक बार और प्रयास करना।


कड़ी मेहनत का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है।


महान विचार मांसपेशियों में ही उत्पन्न होते हैं।


एक मुकदमा समय की आत्महत्या के समान है।


मैं अपनी सारी सफलता का श्रेय इस बात को देता हूं कि मैंने अपने कार्य स्थल पर कभी घड़ी नहीं लगाई।


यदि हम वह प्रत्येक चीज कर दें जिसके हम सक्षम हैं तो यथार्थ में हम खुद को चकित कर देंगे।


मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने कभी भी हथियारों का आविष्कार नहीं किया।


किसी भी आईडिया को विकसित करने वाला वह प्रत्येक व्यक्ति उस पर तब तक काम करता है जब तक कि वह उसे असंभव ना लगने लगे और इसके बाद वह निराश हो जाता है यह वह जगह नहीं जहां पर निराश हुआ जाए।


बस इसलिए कि वह चीज यह कार्य नहीं करती जिसके लिए वह बनाई गई है इसका मतलब यह नहीं कि वह बेकार है।


आप जो हैं वह आपके काम में दिखेगा।


मैं अपनी सबसे बड़ी खुशी का अपना ईनाम उस कार्य में प्राप्त कर लेता हूं जिसे दुनिया सफलता कहती है।


यदि आप मुझे पूर्ण रूप से संतुष्ट व्यक्ति दिखा सकते हैं तो मैं भी आपको तुरंत एक असफल व्यक्ति दिखा सकता हूं।


जब मैं पूरी तरह से तय कर लेता हूं कि कोई परिणाम प्राप्त होने योग्य है तो ही मैं आगे बढ़ता हूं और परीक्षण पे परीक्षण करता जाता हूं, जब तक कि उक्त परिणाम ना आ जाए।


जब आपने सभी संभावनाओं को समाप्त कर दिया है याद रखिए आपने नहीं किया है।

वह प्रत्येक चीज पा लेता है; जो इंतजार करने की बजाय विपरीत परिस्थितियों में भी कार्य करता है।


आविष्कार करने के लिए एक अच्छी कल्पना और कुछ कबाड़ के ढेर की आवश्यकता होती है।


शरीर का मुख्य कार्य होता है मस्तिष्क को इधर-उधर ले जाना।


मैंने अपने जीवन में एक भी दिन काम नहीं किया यह सब मनोरंजन था।


कुछ भी हासिल करने के लिए यह तीन चीजें बहुत जरूरी है कड़ी मेहनत, दृढ़ता और कॉमन सेंस।


मैं वहां से शुरू करता हूं जहां से आखिरी व्यक्ति ने छोड़ा था।


काबिलियत से ज्यादा अवसर हैं।


मैंने कुछ भी दुर्घटना बस नहीं किया ना ही मेरे कोई आविष्कार दुर्घटना की वजह से हुएं वह काम द्वारा आए।

आपको कैसे लगे थॉमस अल्बा एडिसन के अनमोल विचार एक बार कमेंट करके जरूर बताइये। 

धन्यवाद !

Comments

  1. आपकी 👍Website बहुत अच्छी है। में ने आपकी Website को bookmark करके रखा है। आपके 👌article भी काफी Useful है। Thanks for sharing very useful knowledge🙏

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थॉमस अल्बा एडिसन के बारे में कुछ रोचक तथ्य।

थॉमस अल्बा एडिसन  का जन्म  11 फरबरी 1847  को संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ था। उनकी माता का नाम  सैमुअल ऑग्डन एडिसन  तथा पिता का नाम  नैन्सी मैथ्यू एलियट  था। वे अपने माता पिता की सातवीं संतान थे।  थॉमस अल्बा एडिसन एक महान वैज्ञानिक थे। उन्होंने  अपने जीवन में हजारों अविष्कार किये थे। विद्युत बल्ब का अविष्कार इनका महान अविष्कार था।  आज हम जानेंगे एडिसन के जीवन की कुछ ऐसी घटनाएं जो आपको प्रेरणा से भर देंगे।  1- महान एडिशन अपनी खोजों में इस प्रकार खोए रहते थे कि कई दिनों तक प्रयोगशाला से बाहर भी नहीं निकलते थे। यहां तक कि अपना भोजन भी वही मंगा लेते थे। कई बार तो उनकी पत्नी यह देखकर उनसे नाराज भी हो जाती थीं। काफी दिनों बाद एडिसन जब अपनी प्रयोग से बाहर आए तो उनकी पत्नी ने उन्हें सलाह दी " आप दिन-रात काम में लगे रहते हैं कभी-कभी दो-चार दिन की छुट्टी भी ले लिया करो "। एडिशन ने कहा " वह तो ठीक है लेकिन मैं छुट्टी लेकर जाऊंगा कहां "।  पत्नी " जहां आपका मन करे "। फिर एडिशन ने कहा " तो फिर मैं वही जाता हूं "। ...

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